लाल सिर वाला गिद्ध (Sarcogyps calvus), जिसे अक्सर 'एशियाई राजा गिद्ध' के रूप में जाना जाता है, भारतीय उपमहाद्वीप का एक राजसी और दुर्लभ शिकारी पक्षी है। यह पारिस्थितिकी तंत्र में एक महत्वपूर्ण सफाईकर्मी की भूमिका निभाता है।
Sarcogyps calvus
| Scientific Name | Sarcogyps calvus |
|---|---|
| Status | CR गंभीर रूप से संकटग्रस्त |
| Size | 85-85 cm (33-33 inch) |
| Colors |
Black
Grey
|
लाल सिर वाला गिद्ध (Sarcogyps calvus), जिसे अक्सर 'एशियाई राजा गिद्ध' के रूप में जाना जाता है, भारतीय उपमहाद्वीप का एक राजसी और दुर्लभ शिकारी पक्षी है। यह पारिस्थितिकी तंत्र में एक महत्वपूर्ण सफाईकर्मी की भूमिका निभाता है।
इस गिद्ध की लंबाई लगभग 85 सेंटीमीटर होती है। इसकी सबसे विशिष्ट पहचान इसका गहरा लाल या नारंगी रंग का नग्न सिर और गर्दन है। इसका शरीर मुख्य रूप से काले रंग का होता है, जबकि इसके सीने पर सफेद रंग का एक पैच होता है। इसकी चोंच मजबूत और मांस फाड़ने के लिए विशेष रूप से विकसित होती है।
लाल सिर वाला गिद्ध मुख्य रूप से खुले मैदानों, खेती योग्य भूमि, और विरल जंगलों में रहना पसंद करता है। यह आमतौर पर हिमालय की तलहटी से लेकर दक्षिण-पूर्व एशिया के विभिन्न क्षेत्रों में पाया जाता है। यह ऊंचे पेड़ों पर अपना बसेरा बनाता है।
यह पक्षी मुख्य रूप से मरे हुए जानवरों (Scavenger) का मांस खाता है। अन्य गिद्धों की तुलना में, यह भोजन के लिए बहुत अधिक प्रतिस्पर्धी नहीं होता और अक्सर छोटे समूहों में या अकेले ही भोजन करना पसंद करता है।
इनका प्रजनन काल आमतौर पर दिसंबर से अप्रैल के बीच होता है। ये ऊंचे पेड़ों की सबसे ऊपरी शाखाओं पर टहनियों और सूखी घास की मदद से बड़ा घोंसला बनाते हैं। मादा आमतौर पर एक समय में केवल एक ही अंडा देती है।
यह प्रजाति अन्य गिद्धों की तुलना में कम सामाजिक होती है। ये अक्सर अकेले या जोड़ों में उड़ते देखे जाते हैं। इनका स्वभाव शांत होता है, लेकिन भोजन के समय ये काफी सतर्क रहते हैं।
लाल सिर वाला गिद्ध वर्तमान में IUCN की रेड लिस्ट में 'गंभीर रूप से लुप्तप्राय' (Critically Endangered) के रूप में सूचीबद्ध है। डाइक्लोफेनाक जैसी दवाओं के दुष्प्रभाव और आवास की कमी के कारण इनकी संख्या में भारी गिरावट आई है।
लाल सिर वाला गिद्ध हमारे पर्यावरण को स्वच्छ रखने में महत्वपूर्ण योगदान देता है। इस राजसी पक्षी का संरक्षण न केवल जैव विविधता के लिए बल्कि मानव स्वास्थ्य के लिए भी अत्यंत आवश्यक है। हमें इनके प्राकृतिक आवासों को बचाने के लिए ठोस कदम उठाने होंगे।
Official Distribution Data provided by BirdLife International and Handbook of the Birds of the World (2025)