Ashy Drongo की बुनियादी जानकारी
| Scientific Name | Dicrurus leucophaeus |
|---|---|
| Status | LC सबसे कम चिंता |
| Size | 29-29 cm (11-11 inch) |
| Colors |
Black
Grey
|
| Type | Perching Birds |
स्थानीय भाषाओं में नाम
| assamese: | ছাইৰঙী ফিচৰী, ছাইৰঙী কদম চৰাই |
|---|---|
| bengali: | ছাইরাঙা ফিঙে, ধূসর ফিঙে |
| bhojpuri: | कोतवाल, भुजंगा |
| french: | Drongo cendré |
| gujarati: | રાખોડી કોસીટ |
| hindi: | धूसर भुजंगा, राख-रंगी भुजंगा |
| kannada: | ಬೂದು ಕವಲುವಾಲ, ಬೂದು ಡ್ರೊಂಗೊ |
| malayalam: | കാക്കത്തമ്പുരാൻ |
| marathi: | राखाडी कोतवाल |
| nepali: | ध्वाँसे चिबे |
| oriya: | ছাই রঙা ফিঙে |
| portuguese: | drongo-cinzento, drongo-de-cinza |
| punjabi: | ਖਾਕੀ ਭੁਜੰਗੀ, ਸੁਆਹੀ ਭੁਜੰਗੀ |
| spanish: | Drongo cenizo, Drongo gris |
| tamil: | கரிச்சான் |
| telugu: | బూడిద రంగు కాకి, బూడిద రంగు డ్రోంగో |
परिचय
ऐश ड्रोंगो (Dicrurus leucophaeus), जिसे हिंदी में कभी-कभी स्लेटी भुजंगा भी कहा जाता है, ड्रोंगो परिवार 'डिक्रुरिडे' (Dicruridae) का एक प्रमुख सदस्य है। यह पक्षी दक्षिण और दक्षिण-पूर्वी एशिया में व्यापक रूप से फैला हुआ है। अपनी चपलता और शिकार करने की अद्भुत क्षमता के कारण यह पक्षी प्रेमियों के बीच काफी लोकप्रिय है।
शारीरिक बनावट
वयस्क ऐश ड्रोंगो मुख्य रूप से गहरे स्लेटी (ashy grey) रंग का होता है। इसकी लंबाई लगभग 29 सेंटीमीटर होती है। इसकी सबसे विशिष्ट पहचान इसकी लंबी और गहरी कटी हुई (forked) पूंछ है। इसकी आंखें गहरे लाल (crimson) रंग की होती हैं, जो इसे एक तीखा रूप देती हैं। इसकी कुछ उप-प्रजातियों के सिर पर सफेद निशान भी हो सकते हैं, जबकि युवा पक्षी थोड़े सुस्त और भूरे-स्लेटी रंग के होते हैं।
प्राकृतिक आवास
ऐश ड्रोंगो विभिन्न प्रकार के वातावरण में रहने के अनुकूल होते हैं। उनके आवासों का विवरण इस प्रकार है:
- प्राकृतिक आवास: ये उष्णकटिबंधीय और उपोष्णकटिबंधीय नम पर्वतीय वनों, तलहटी के जंगलों, मैंग्रोव और शुष्क झाड़ियों में पाए जाते हैं।
- कृत्रिम आवास: ये ग्रामीण उद्यानों, वृक्षारोपण, कृषि भूमि और खराब हो चुके जंगलों में भी देखे जा सकते हैं।
- ये आमतौर पर समुद्र तल से 0 से 2400 मीटर तक की ऊंचाई वाले क्षेत्रों में निवास करते हैं।
आहार
ऐश ड्रोंगो मुख्य रूप से कीटभक्षी (insectivorous) होते हैं। इनके आहार में निम्नलिखित शामिल हैं:
- प्राथमिक भोजन: उड़ने वाले कीट, ड्रैगनफ्लाई, पतंगे, भृंग, पंख वाले दीमक, चींटियाँ, टिड्डे और झींगुर।
- अन्य भोजन: ये कभी-कभी फूलों का रस, छोटी छिपकलियां, छोटे स्तनधारी और अन्य पक्षियों के अंडे या चूजे भी खाते हैं।
- ये अक्सर ऊंचे स्थानों पर बैठकर शिकार की प्रतीक्षा करते हैं और हवा में ही कीटों को पकड़ लेते हैं।
प्रजनन और घोंसला
ऐश ड्रोंगो का प्रजनन काल आमतौर पर मई से जून के बीच होता है। ये ऊंचे पेड़ों पर प्याले के आकार का एक ढीला घोंसला बनाते हैं। मादा एक बार में तीन से चार लाल या भूरे रंग के अंडे देती है। इनके घोंसले अक्सर सुरक्षित और ऊंचे स्थानों पर स्थित होते हैं।
व्यवहार
यह पक्षी बहुत ही सक्रिय और साहसी स्वभाव का होता है। यह अक्सर पेड़ों की ऊंची टहनियों पर बिल्कुल सीधा होकर बैठता है। ऐश ड्रोंगो अकेले, जोड़े में या छोटे समूहों में पाए जाते हैं। प्रवास के दौरान इन्हें छोटे झुंडों में उड़ते देखा जा सकता है। ये पक्षी अपनी आवाज़ में विविधता के लिए जाने जाते हैं और अन्य पक्षियों की पुकार की नकल करने में बेहद माहिर होते हैं।
संरक्षण स्थिति
संरक्षण की दृष्टि से, ऐश ड्रोंगो को आईयूसीएन (IUCN) की रेड लिस्ट में 'कम चिंताजनक' (Least Concern) श्रेणी में रखा गया है। इनकी आबादी काफी स्थिर है और ये दक्षिण एशिया के बड़े हिस्से में पाए जाते हैं।
रोचक तथ्य
- ऐश ड्रोंगो 'कॉमन आयोरा' (Common Iora) जैसे अन्य पक्षियों की सीटी जैसी आवाज़ की सटीक नकल कर सकता है।
- इनकी पूंछ का आकार इन्हें हवा में बहुत तेजी से मुड़ने और कलाबाजी करने में मदद करता है।
- इनकी आंखों का गहरा लाल रंग इन्हें अंधेरे और घने जंगलों में देखने में सहायता करता है।
- ये कीटों को पकड़ने के लिए हवा में गोता लगाने (aerial sallies) में माहिर होते हैं।
पक्षी प्रेमियों के लिए टिप्स
- ऐश ड्रोंगो को देखने का सबसे अच्छा समय सुबह और शाम का होता है जब वे सक्रिय रूप से शिकार करते हैं।
- इन्हें अक्सर बिजली के तारों या ऊंचे सूखे पेड़ों की शाखाओं पर बैठे हुए देखा जा सकता है।
- इनकी विशिष्ट 'ड्रैंग गिप' या 'गिप-गिप-ड्रैंग' जैसी आवाज़ों को सुनकर इन्हें आसानी से पहचाना जा सकता है।
- दूरबीन का उपयोग करें ताकि आप उनकी लाल आंखों और पूंछ के आकार को स्पष्ट रूप से देख सकें।
निष्कर्ष
ऐश ड्रोंगो प्रकृति का एक अत्यंत सुंदर और कुशल शिकारी पक्षी है। इसकी नकल करने की कला और हवा में शिकार करने का अंदाज इसे विशेष बनाता है। हालांकि यह वर्तमान में सुरक्षित है, लेकिन इसके प्राकृतिक आवासों का संरक्षण करना हमारी जिम्मेदारी है ताकि आने वाली पीढ़ियां भी इस अद्भुत पक्षी को देख सकें।