पपीहा (Common Hawk Cuckoo), जिसे वैज्ञानिक रूप से Hierococcyx varius कहा जाता है, भारतीय उपमहाद्वीप में पाया जाने वाला एक प्रसिद्ध पक्षी है। इसे अक्सर इसकी विशिष्ट 'ब्रेन-फीवर' पुकार के लिए जाना जाता है।
Hierococcyx varius
| Scientific Name | Hierococcyx varius |
|---|---|
| Status | LC सबसे कम चिंता |
| Size | 34-34 cm (13-13 inch) |
| Colors |
Grey
Black
|
पपीहा (Common Hawk Cuckoo), जिसे वैज्ञानिक रूप से Hierococcyx varius कहा जाता है, भारतीय उपमहाद्वीप में पाया जाने वाला एक प्रसिद्ध पक्षी है। इसे अक्सर इसकी विशिष्ट 'ब्रेन-फीवर' पुकार के लिए जाना जाता है।
पपीहा की लंबाई लगभग 34-34 सेमी होती है। इसका रंग ऊपर से राख जैसा भूरा और नीचे से सफेद होता है, जिस पर भूरे रंग की धारियां होती हैं। इसकी शारीरिक बनावट 'शिकरा' (Shikra) जैसे शिकारी पक्षी से बहुत मिलती-जुलती है, जिससे यह अन्य पक्षियों को भ्रमित कर देता है।
यह पक्षी मुख्य रूप से पर्णपाती वनों, खुले जंगलों, बगीचों और कृषि क्षेत्रों में पाया जाता है। यह घने पेड़ों की शाखाओं के बीच छिपकर रहना पसंद करता है।
पपीहा का मुख्य आहार कीड़े-मकौड़े और इल्लियां (Caterpillars) हैं। यह विशेष रूप से बालों वाली इल्लियों को खाना पसंद करता है, जिन्हें अन्य पक्षी अक्सर छोड़ देते हैं। कभी-कभी यह छोटे फल और जामुन भी खाता है।
पपीहा एक नीड़ परजीवी (Brood Parasite) है, जिसका अर्थ है कि यह अपना घोंसला खुद नहीं बनाता। यह आमतौर पर 'जंगल बैबलर' (Jungle Babbler) जैसे पक्षियों के घोंसलों में अपने अंडे देता है और उन्हीं से अपने बच्चों का पालन-पोषण करवाता है।
इसका व्यवहार काफी शर्मीला होता है और इसे देख पाना कठिन होता है, लेकिन इसकी आवाज दूर-दूर तक सुनी जा सकती है। इसकी पुकार तीन सुरों वाली होती है जो धीरे-धीरे तेज और ऊँची होती जाती है। यह अक्सर गर्मियों और मानसून की शुरुआत में अधिक सक्रिय होता है।
IUCN रेड लिस्ट के अनुसार, पपीहा को 'कम चिंताजनक' (Least Concern) श्रेणी में रखा गया है। इसकी व्यापक उपस्थिति और स्थिर आबादी के कारण वर्तमान में इसके संरक्षण को लेकर कोई बड़ा खतरा नहीं है।
पपीहा अपनी अनूठी आवाज और पारिस्थितिक तंत्र में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका के कारण एक दिलचस्प पक्षी है। हालांकि यह एक परजीवी पक्षी है, लेकिन इसकी उपस्थिति हमारे पर्यावरण की जैव विविधता को दर्शाती है।
Official Distribution Data provided by BirdLife International and Handbook of the Birds of the World (2025)