शिखाधारी हॉक-ईगल (Nisaetus cirrhatus), जिसे 'चेंजएबल हॉक-ईगल' के नाम से भी जाना जाता है, दक्षिण और दक्षिण-पूर्वी एशिया में पाया जाने वाला एक शक्तिशाली शिकारी पक्षी है। यह अपनी विशिष्ट शिखा और शिकार करने की अद्भुत क्षमता के लिए प्रसिद्ध है।
Nisaetus cirrhatus
| Scientific Name | Nisaetus cirrhatus |
|---|---|
| Status | LC सबसे कम चिंता |
| Size | 58-77 cm (23-30 inch) |
| Colors |
Brown
Black
|
शिखाधारी हॉक-ईगल (Nisaetus cirrhatus), जिसे 'चेंजएबल हॉक-ईगल' के नाम से भी जाना जाता है, दक्षिण और दक्षिण-पूर्वी एशिया में पाया जाने वाला एक शक्तिशाली शिकारी पक्षी है। यह अपनी विशिष्ट शिखा और शिकार करने की अद्भुत क्षमता के लिए प्रसिद्ध है।
इस पक्षी की लंबाई लगभग 58 से 77 सेंटीमीटर के बीच होती है। इसके सिर पर एक लंबी और पतली शिखा (crest) होती है, जो इसे अन्य शिकारी पक्षियों से अलग पहचान देती है। इसका ऊपरी हिस्सा भूरा होता है और निचला हिस्सा सफेद या हल्का पीला होता है, जिस पर गहरे रंग की धारियां बनी होती हैं। इसकी आंखें पीली और पंजे बेहद मजबूत होते हैं।
शिखाधारी हॉक-ईगल मुख्य रूप से खुले जंगलों, पहाड़ी क्षेत्रों, और खेती वाले इलाकों के पास पाया जाता है। यह घने जंगलों की तुलना में उन क्षेत्रों को अधिक पसंद करता है जहाँ पेड़ों के बीच शिकार के लिए पर्याप्त जगह हो। यह अक्सर ऊंचे पेड़ों की चोटी पर बैठा देखा जा सकता है।
यह एक मांसाहारी पक्षी है जिसका आहार काफी विविध होता है। इसके मुख्य भोजन में शामिल हैं:
इनका प्रजनन काल आमतौर पर दिसंबर से अप्रैल के बीच होता है। ये ऊंचे पेड़ों पर टहनियों और सूखी लकड़ियों की मदद से एक बड़ा और मजबूत घोंसला बनाते हैं। मादा आमतौर पर एक ही अंडा देती है, और दोनों माता-पिता मिलकर चूजे की देखभाल करते हैं।
यह एक एकांतप्रिय पक्षी है। यह अक्सर पेड़ों की शाखाओं पर सीधा बैठकर घंटों अपने शिकार का इंतजार करता है। इसकी उड़ान बहुत ही संतुलित होती है और यह घने पेड़ों के बीच भी बड़ी फुर्ती से मुड़ सकता है। इसकी आवाज काफी तीखी और तेज होती है।
IUCN रेड लिस्ट के अनुसार, शिखाधारी हॉक-ईगल को 'कम चिंताजनक' (Least Concern) श्रेणी में रखा गया है। हालांकि, जंगलों की कटाई और प्राकृतिक आवास के नष्ट होने से इनकी संख्या पर प्रभाव पड़ सकता है।
शिखाधारी हॉक-ईगल भारतीय वन्यजीवों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह न केवल पारिस्थितिकी तंत्र में संतुलन बनाए रखने में मदद करता है, बल्कि अपनी सुंदरता से पक्षी प्रेमियों को आकर्षित भी करता है। इनके संरक्षण के लिए वनों का बचाव अत्यंत आवश्यक है।
Official Distribution Data provided by BirdLife International and Handbook of the Birds of the World (2025)